रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के औचक निरीक्षण में अव्यवस्थाएं उजागर, मरीजों ने घेरकर शिकायतें कीं। डिप्टी सीएम ने डीन और अधीक्षक को फटकार लगाई, पार्किंग ठेका निरस्त करने के निर्देश दिए।
रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 13 करोड़ की एमआरआई मशीन दिन में जांच कर रही है, लेकिन रात में सुविधा बंद होने से मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
रीवा में सरकारी ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी, थैलेसीमिया व कैंसर पीड़ित बच्चों ने कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई।
रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के दौरान प्रसूता सविता साहू और नवजात की मौत के बाद हंगामा। परिजनों का आरोप-ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही, मौत छिपाई गई, वेंटिलेटर पर दिखावा किया। गायनी विभाग में स्टाफ की कमी, कई डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी। परिजन एफआईआर की मांग पर अड़े।
रीवा और मऊगंज में अगस्त महीने में 90 मृतकों के शव नि:शुल्क शव वाहन से घरों तक पहुँचाए गए। सरकार ने 108 एम्बुलेंस सेवा को मरीजों की जान बचाने के साथ ही अब शव ढोने की जिम्मेदारी भी दे दी है। यह सेवा नि:शुल्क है लेकिन इसमें कई खामियाँ हैं, जैसे-शव वाहन जिला सीमा पार नहीं कर सकता।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में डिप्टी सीएम के लोकार्पण कार्यक्रम से पहले बड़ा हादसा टल गया। एसी डक्ट सिस्टम के पैनल में अचानक आग भड़क गई, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए समय रहते आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट और पुराने तारों के कारण यह घटना हुई।
रीवा के मिनर्वा अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा। परिजनों का आरोप – ऑपरेशन के बाद मरीज को मृत बताने में देरी की गई और 20 लाख रुपये वसूले गए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू की।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आधी रात न्यूरोलॉजी वार्ड की फॉल सीलिंग भरभरा कर गिर गई। मरीज जान बचाकर भागे, कई घायल हुए, लेकिन जनहानि नहीं हुई। अस्पताल प्रबंधन ने पीडब्ल्यूडी को फॉल सीलिंग हटाने के लिए पत्र लिखने की बात कही।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एनएबीएच टीम ने तीन वर्षों बाद सघन निरीक्षण किया। टीम ने इलाज की गुणवत्ता, डॉक्टर-स्टाफ की उपलब्धता, ओटी, आईसीयू, मेस और ब्लड बैंक तक की सुविधाओं का अवलोकन किया। शनिवार को टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी और लापरवाही चरम पर है। सुबह OPD समय पर नहीं पहुंचते डॉक्टर, मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। करोड़ों की लागत से बना अस्पताल और लाखों की सैलरी पाने वाले डॉक्टर अनुबंध के बावजूद निजी प्रैक्टिस में व्यस्त। डीन और अधीक्षक की लापरवाही से बिगड़ी व्यवस्था। जानिए पूरी रिपोर्ट।






















